STORYMIRROR

कहीं धुप है...

कहीं धुप है कहीं छाया कंचन रूपी है ये काया कुछ है तो इस संसार में वो है  सिर्फ  मोह माया

By प्रेमयाद कुमार नवीन
 179


More hindi quote from प्रेमयाद कुमार नवीन
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments