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कहीं धुप है कहीं...
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कहीं धुप है...
“
कहीं धुप है कहीं छाया कंचन रूपी है ये काया कुछ है तो इस संसार में वो है सिर्फ मोह माया
”
By
प्रेमयाद कुमार नवीन
180
धुप
छाया
&39;झुकायानकरोकिसीकोनउठायाकरो
नरकमेंलेजाताहैअंहकारकाद्वार।जीतसकोतोजीतलोसंस्कारसेसंसार।
विजयकंचन
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hindi quote
from
प्रेमयाद कुमार नवीन
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