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ख़ामोशी...

ख़ामोशी चाहता हूँ मैं लेकिन तुम न कहते हुए भी बहुत कुछ कहती हो तोड़ देती है उन बांधों को जिनके पीछे उम्मीद भरी बातें सहेजे रखता हूँ मैं

By Shirish Pathak
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