STORYMIRROR

कड़कती धूप...

कड़कती धूप में छाँव की ठंडी नमीं हो तुम मैं बंजर वीरान हूँ मगर मेरी सरज़मीं हो तुम तुम्हारे बिना मेरा कोई वजूद ही नहीं मेरी हर कमीं को लाज़मी हो तुम

By Fanindra Bhardwaj
 53


More hindi quote from Fanindra Bhardwaj
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments