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काश के...

काश के आंखों के बाज़ार में आंसुओं की किस्में मिल जातीं ये जो कुछ लोग आंसू बहाने का ढोंग करते हैं, कम से कम पहचान में तो आते। -राज सरगम

By Raj Sargam
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