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जिस पथ पर...

जिस पथ पर तुम बड़ रहें अभिमान में, सुनों लो मेरे हे भारतीयों! तुम हो अभी गुमान में, आपस में लड़ कर अपनी ही पहचान तुम भूला रहें, क्यों अच्छें-ख़ासे लोकतंत्र को राजतंत्र बना रहें, आदित्य चंद्रा

By Aditya chandra
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