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#जिंदगी को...

“ #जिंदगी को सकूं का एक कतरा मिल गया होता, कोई अपना न सही. . . गैर ही मिल गया होता ! थक चुके हैं हम लम्हों की गिनती करते-करते, कितनी घड़ियाँ और है मौत आने में, इसी का पता मिल गया होता !! /वीर / ”

By Virender Veer Mehta
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