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जहाँ भी जाते थे...
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जहाँ भी...
“
जहाँ भी जाते थे महफ़िल सजा देते थे, कमबख्त ज़ालिम मोहब्बत ने ख़ामख़ा बदनाम कर दिया है।।
”
By
Ashish Pathak
32
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