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जाने कब...

जाने कब तेरी जुस्तजू मंझील बन गयी... आरजू हैं अब विसाल-ए-यार मयस्सर हो । तनया कमल अनिलकुमार शिंदे

By Tanaya (तनया) Shinde (शिंदे)
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