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ज़ुठे अरमानों...
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ज़ुठे...
“
ज़ुठे अरमानों और सपनें दिखाकर, आज़ कल शादीयां होती है, लेकिन असलीयत ज़ब सामने आती है तो "मुरली", बेटियां आंसु बहाकर रोती है।" -धनजीभाई गढीया" मुरली"
”
By
Dhanjibhai gadhiya "murali"
46
तुममेरीहसीनआंखोंकीजानहोइसदिलमेंबसेअरमानोंकीउड़ानहो
सपनें
शादीयां
असलीयत
बेटियां
रोतीहै
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Dhanjibhai gadhiya "murali"
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