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हमने तो...

हमने तो परिंदो को खुली हवा में बेपरवाह, मस्त उड़ते-उड़ते, मंजिलों पर पहुंचते देखा है, तो फिर हम इंसानों के लिए ही कटीली पथरीली राहों पर चल कर मंजिलें पाने की बंदिश क्यों...

By Rajesh SAXENA
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