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हमें माफ...
“
हमें माफ करदे परवरदिगार, हम गुनहगार तेरी रहमत के तलबगार है, इतनी भी क्या नाराजगी, शिशेसी जिंदगी दे कर हाथमें पत्थर उठा लिया है!
”
By
Abid Khanusia
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परवरदिगार
रहमत
तलबगार
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Abid Khanusia
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