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हम सब...

हम सब अंधानुकरण कर पर संस्कृति का, कर बैठे हैं प्रदूषित संस्कृति,वायु और जल। भूले निज संस्कार आधुनिकता के नाम पर, लेने लगे हैं सामिष खाद्य और अल्कोहल। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

By Dhan Pati Singh Kushwaha
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