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हम अपने आप...
“
हम अपने आप को तेरे दर पे छोड़ आये है, लाये है ज़िस्म ख़ाली ये धड़कन तोड़ आये है। संभालो या मिटा दो अब तक़दीर की लकीरों को, हम हर फै़सला अब तुम्हारे हाथों छोड़ आये है।। मधु गुप्ता "अपराजिता"
”
By
Madhu Gupta
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Madhu Gupta
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