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“
है ईश्वर, मे जानता नेहिं मे क्षमा कि लायक हुं कि नहिं; फिर भी आपसे बीतती, आप क्षमा कर के मुझे और मेरे जानने वाले कु सन्मार्ग दिखाएगें।
”
By
Prahallad Sahoo
16
क्षमा सागर
लायक
आपल्यालाकितीहीमानसशास्त्राचाअभ्यासअसला
सन्मार्ग
दूसरेकेभरोसेबहुतजीलिएअबतक।चलोअबअपनेभरोसेकुछजीकरदिखाएँ।
अंधकारकोक्योंधिक्कारेअच्छाहैएकदीपजलाये।कर्मोंकीअद्भुतज्योतिसेअपनाजीवनपथचमकाये।
वो मुझसे
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Prahallad Sahoo
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