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गुरूर था जो...

गुरूर था जो हमारा वो अब बिखर सा गया है आइने में एक शक्ष निखर सा गया है। ऐतबार का वो आलम अब सिमट सा गया है अब जो बचा है मुझसे वो कुछ सिमट सा गया है ।।।

By Gaurav Dhaudiyal
 201