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गर मैं भूल...

गर मैं भूल जाऊ याद तुम करा देंना काँटे भरी डगर में फूल तुम बिछा देंना जो जुबाँ न कहे वो आँखों से बयां करना फिर भी ना-समझू तो जो चाहें सजा देंना।

By प्रेमयाद कुमार नवीन
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