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गाँव के...
“
गाँव के गालीमहोल्लो की बरकत शहर के ट्राफिक वाले रास्तों में कहाँ? वह धूल मिटटी पे पहले बारिश की खुश्बु पकी सड़को पे कहाँ? दरवाज़े पे शाम से मेरे आने की आस लगाए एकटुक राह देखती मेरी माँ की निगाहें कहाँ ?
”
By
Devanshu Ruparelia
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गाँव
शहर
बरकत-ए-इश्क
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Devanshu Ruparelia
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