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दूसरा आज कल आज आना जाना बीतेदिनयादें करनापड़ताहैसबकोहीश्रम।देताहैपरमात्मासिर्फलकीरे चाहतेहोजिंदगीकोसमझनातोपीछेदेखो उमंग उत्साह गया गुज़रा बिता हुआ मुद्दत बसंत ना आया ख़ुशी सपने खुली आँखों के साल दर साल नया पुराना साल मलाल हम दुनियां वैसी