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एक शाम रस्ते पर...
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एक शाम...
“
एक शाम रस्ते पर खड़ी मैं यह सोचती हूँ, 'मंजिल कितनी दूर है?' ये पेड़ स्थायी मुझ पथिक को आराम पूछते हैं, अब इन्हें कौन बताये हम सफर पर निकले है ठहरने नहीं । - मोनिका शर्मा
”
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Monika Sharma
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