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एक जल की...

एक जल की धारा से थे हम ना रास्ता मालूम था, ना मंजिल का पता! जब चलने की ठान ही ली, बेख़ौफ़ होकर चल पड़े हम !! - सुमेर सिंह आर्य संस्थान

By डॉ० कुलवीर बैनीवाल
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