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दयालु-भाव ही...
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दयालु-भाव...
“
दयालु-भाव ही मनुज का धर्म है, सदा पालन करते रहें हम निज धर्म। रक्षण-संरक्षण जड़-चेतन का करते रहें, अस्तित्व को बचाने हित,बड़ा जरूरी कर्म। @ डी पी सिंह कुशवाहा @
”
By
Dhan Pati Singh Kushwaha
375
दयालु- भाव
मनुज का धर्म
पालना
रक्षण-संरक्षण
जड़-चेतन
अस्तित्व
कर्मभूमिपरफलकेलिए
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Dhan Pati Singh Kushwaha
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