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धूप-छांव से हैं...
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धूप-छांव से...
“
धूप-छांव से हैं सुख-दु:ख, जीवन में रहते आते-जाते। आशा-निराशा के गोते हम, जीवन सागर में रहते लगाते। # गायत्री सिंह #
”
By
Gayatri Singh
39
धूप -छांव
सुख -दु:ख
आणिनितीमत्ताजिवनाचेहेत्रीसुत्रअंगिकारूनचालतराहणे.हाचजीवनप्रवासहोय.🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸भंडारा
आशा
क्याहैकुंठा-घुटनक्याहैव्यथा-निराशा
जीवन सागर
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