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धीरे धीरे बातों...
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धीरे धीरे...
“
धीरे धीरे बातों को फ़ुरसत हो रही है। तेरे बग़ैर जीने की आदत हो रही है। फ़हिमा
”
By
Fahima Farooqui
52
हिंदी शायरी ✍
हिंदी कविता
आदत
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hindi quote
from
Fahima Farooqui
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