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चांद से...
“
चांद से गोरे मुखड़े पर बिखरी भीगी अलकें अलसुबह उनींदे लोचन मसि रेखित थी वे पलकें इंदु कोठारी ✍️
”
By
Indu Kothari
328
चांद मुखड़ा
भीगी अलकें
उनींदें लोचन
बिखरी मसि
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hindi quote
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Indu Kothari
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