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भूल न सकता...
“
भूल न सकता जग यहाॅं, माॅं तेरे उपकार।मानव के ही रूप में, जन्म मिले हरबार।।
”
By
Dipnarayan Jha
38
भूला
उगाचचिंतीतहोतो.हेसमजतउमजतअसूनहीकामाणूसवर्तमानातजगणसोडतो.अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि
उपकार
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Dipnarayan Jha
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