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भुल गई...
“
भुल गई है.... ऋतुएँ अपने महीनों को, अब बरसात किसी भी मौसम में आ जाती है.... फैल रहा है चारों तरफ़ अधर्म का माया जाल, इंसानियत भी अब इंसान पर रो जाती है.... आरती सिरसाट
”
By
Aarti Sirsat
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प्रेरणादायक
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