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बैरी सावन...

बैरी सावन क्यों मनभावन साथ नहीं जब मेरे साजन ये बूंदें क्यों नाच रही हैं, बिजली काहे दमक रही है, क्यों मेघा हैं ताल सुनाते विरह की अग्नि सुलग रही है सब बेरंग है बस इक कारन पास नहीं हैं मेरे साजन :अपराजिता 'अजितेश' जग्गी

By Aprajita 'Ajitesh' Jaggi
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