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"बाबुल के...

"बाबुल के अँगना की मैं चिड़िया भैया मैं तेरी बगिया की बुलबुल। बीता बरस एक आस पीहर की आई राखी नैहर को हूँ व्याकुल।।" रंजना माथुर अजमेर (राजस्थान) मेरी स्वरचित व मौलिक रचना ©

By Ranjana Mathur
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