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"अपने...

"अपने ख्वाबों को हमने कुछ यूही गिर जाने दिया कि पतझर के बाद आता है मौसम मस्त बहारों का खिलखिलातें हैं फूल बागों में और चहचाहतें हैं पंछी नभ नवकिरणों में....."

By Mamta Kushwaha
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