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अंतर्ज्वाला...

अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज। अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज। सभी चाहते ताज, देश के लिए न कोई। गाता स्वारथ-गीत, देखिये जिसको वो ही। करें जतन ज्यों मीत, सभी को मिले निवाला स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला। -कल्पना रामानी, नवी मुंबई

By कल्पना रामानी
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