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अन्जुमन में...

अन्जुमन में रौशन हुये वो बैरी चाँद बन कर मेरी अल्फ के प्रतिबिंब को गढ़ना नहीं आया पढ़ने को तो लाखों लाख खत पढ़ गये वो बस मेरी अब्सार के राज को गढ़ना नहीं आया

By Kanchan Prabha
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