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आते जाते...
“
आते जाते मुझे निहारे। पल-पल मेरा रूप सँवारे। भला लगे उजला उसका तन। क्या सखि साजन? ना सखि दर्पन! -कल्पना रामानी,नवी मुंबई
”
By
कल्पना रामानी
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