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आंखों की जुबां...
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आंखों की...
“
आंखों की जुबां समझे न दिल की बेक़रारी. ये किस बेरहम के लिए मैं अपना सुकूँ हारी..! फ़हिमा
”
By
Fahima Farooqui
273
हिंदी शायरी ✍
हिंदी कविता
सुकूँ
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Fahima Farooqui
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