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आज मेरे...

आज मेरे वास्ते तो मोहब्बत भी मेहरबाँ है आज मेरे लिए महबूब ही मेरा अब गुमाँ है रूह में एक दूजे के हर पल ही रहने लगे हैं अब दूरियाँ हम दोनों के भले ही दरमियाँ है

By कुन्दन कुमार
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