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“
⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪ आज धुंध बहुत है--- मेरे शहर में, अपने दिखते नहीं, और जो दिख रहे हैं--- वह अपने नहीं। । नेह के नाते तक धुंधला गए, धुंध ने ऐसी चादर बिछाई, कि, अपने अपनों से शरमा गये, आज धुंध बहुत है मेरे शहर में
”
By
Ashu Kapoor
32
गर्मीमेंबारिशबारिशमेंसूखा!!अँधाधुंधकटतेबृक्षोंसेवनजंगलवीरानहुए
शहर
दुनीयाकेसामनेहसनेकेलिये
नाते
थुंथला गए
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Ashu Kapoor
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