बचपन और पचपन
बचपन और पचपन
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मुझे याद है,
अच्छी तरह आज भी।
अपना बचपन,
माँ की गोद में,
उछलना - कूदना,
आँचल म़े छिप जाना।
मुझे याद है,
आज भी माँ की
बाहों का झूला
पिता के कंधों पर
घुमना, पीठ पर सवार हो,
घोड़े की सवारी करना।
मुझे याद है,
वह भाई - बहन से झगड़ना,
लड़ना, बात - बात पर,
कुछ भी भूला नहीं।
एक - एक चीज, आँखौं के सामने,
घूम जाते है, चित्रपट की तरह।
क्या आनन्द था।
ना कोई गम, चिन्ता ना फिक्र,
बस खाना और।
पर आज,वह सब कुछ नहीं,
सिर्फ यादें बन कर रह गयीं।
आज एक जिम्मेदार पिता,
जिम्मेदार पति, जिम्मेदार अभिभावक।
चिन्ता फिक्र से सर के सारे बाल,
झड़ गए, बुढ़ा हो गया,
असमय।
बेटियों की शादी की चिन्ता,
बेटों की पढ़ाई की चिन्ता,
सिर्फ टेन्सन हीं टेन्सन ।
कोई वो मेरा प्यारा सा,
बचपन, फिर से ला दे,
ले ले, मुझसे मेरा उम्र पचपन।
