ektarelan78@gmail.com
Share with friends
खुशबू ससुराल भी पीहर है मायके सा ही सबका जिगर है आँखें भीगती यहां भी अपनों के लिए माँ-बाबा सा ही अंगना और खुशबू इधर है एकता कोचर रेलन