Disha Gaur
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हर गम हर उदासी से दूरी सी है। तुम हो तो हर कमी पूरी सी है। कोई शक न शुबा है कोई, तुम हो तो हर दुआ पे खुदा की मंजूरी ही है। दिशा"नवोदिता"

ख़ाक को उड़ते देखा तो यूँ लगा कि अभी तो गुलाम हैं हम, चल बसें तो परवाज़ मिले। -दिशा"नवोदिता"

फाख़िर हूँ तेरी दरियादिली की मैं, तेरी नवाजिश का नूर हर तरफ देखती हूँ। तुझसे क्या फरियाद करूँ खुदा मेरे, खुद पर सबकी दुआओं का असर देखती हूँ। - दिशा"नवोदिता"

जिस्म की आराइश से न बढ़ा है आफताब किसी का। दुनिया को रोशन करने को रूह आब मांगती है। -दिशा"नवोदिता"

Follow your own instinct... so that if you fall, you wouldn't have anybody to blame..... Because people play blame game and this is the only reason of someone's FALL...... Disha

अल्फ़ाज़ों के धागे से कुछ ख़्वाब बुने हैं। ये मेरे वो अपने हैं जो मैंने खुद चुने हैं। परोसी है आँखों में उम्मीद की बूँदें, पर लगे हैं उम्मीदों के जो मेरे दिल की सुने हैं। .....दिशा

अल्फ़ाज़ों के धागे से कुछ ख़्वाब बुने हैं। ये मेरे वो अपने हैं जो मैंने खुद चुने हैं। परोसी है आँखों में उम्मीद की बूँदें, पर लगे हैं उम्मीदों के जो मेरे दिल की सुने हैं। .......दिशा

हसरतों से भरी इस दुनिया में हज़ारों ख़्वाब सजे हैं। कुछ टूट गए तो कुछ सो गए नाकामयाबी की नींद। ~दिशा


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