Sanjay Pathade Shesh
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मित्रांशी सामायिक करा
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बहा रहे जो उल्टी गंगा, पा रहे वो बधाई भी कुछ दे नहीं रहे जहाँ को और मिटा रहे खुदाई भी बागवां है बाग के जो, वो लुटा रहे अमराई भी तारीख में नाम लिख, शरमा रहीं रोशनाई भी... #संजयशेष

प्रदूषण की मार झेल रही, देश की सारी नदियां राजनीति के चंगुल में, नहीं कर पा रहीं अठखेलियाँ #संजयशेष

खत ही नहीं, मेरे खत के टुकड़ों को रखना संभालकर जोड़ोगे तो वक्त कट जायेगा सफर में #संजयशेष

सुना है कि एक ही फरियाद सुनकर, रब आ जाते थे दरबारों में मगर अब तो दस्तक भी देनी पड़ती है हजारों में #संजयशेष

चलना 🚶 तो था साथ तुम्हारे मगर बेड़ियाँ बंध गई है पांव में अब तलक अकेले ही चलते रहें हैं धूप में ताकि लोग बैठ सके सुकून से छांव में #संजयपठाड़ेशेष

जब तलक तुम मेरे करीब रहे दोस्त मेरे, मेरे रकीब रहे..... संवारी थी तुमने जिन्दगी मेरी बनके मेरा तुम नसीब रहे.....


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