विशाल यादव 'बेबाक'
लेखक | कवि | सत्य अन्वेषक
"कलम की धार से समाज के सच को उकेरने का एक छोटा सा प्रयास।"
मैं एक स्वतंत्र लेखक हूँ जो शब्दों की शक्ति और उनकी गहराई में विश्वास रखता हूँ। मेरा उपनाम 'बेबाक' मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि मेरी लेखनी का स्वभाव है। मैं दोहों, छंदों और कविताओं के माध्यम से... Read more
विशाल यादव 'बेबाक'
लेखक | कवि | सत्य अन्वेषक
"कलम की धार से समाज के सच को उकेरने का एक छोटा सा प्रयास।"
मैं एक स्वतंत्र लेखक हूँ जो शब्दों की शक्ति और उनकी गहराई में विश्वास रखता हूँ। मेरा उपनाम 'बेबाक' मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि मेरी लेखनी का स्वभाव है। मैं दोहों, छंदों और कविताओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक विसंगतियों और आत्म-चिंतन को स्वर देता हूँ।
मेरी दृष्टि:
नाम 'विशाल' है तो सोच में भी विस्तार रखने की कोशिश करता हूँ, और स्वभाव 'बेबाक' है तो सच कहने से कभी पीछे नहीं हटता।
प्रतिनिधि पंक्तियाँ:
पाप किए जो भूमि पर, मन में भरा विकार।
अब ढूँढे चोर आकाश में, छिपने का आधार ॥
यहाँ आप मेरी चुनिंदा रचनाओं और साहित्यिक यात्रा के साक्षी बन सकते हैं। अपनी प्रतिक्रियाओं से मेरा मार्गदर्शन अवश्य करें। Read less