@nkd4z5wt

Vikrant Kumar
Literary Colonel
39
Posts
37
Followers
24
Following

Special Teacher Education dpt. Rajasthan mail-a.vikrant29@gmail.com

Share with friends
Earned badges
See all

Submitted on 11 Jan, 2021 at 14:48 PM

तुम क्या हो? तुम जानते हो। तुम क्या हो? तुम जानते हो। लेकिन मुझसे बेहतर नहीं जानते!!!

Submitted on 10 Jan, 2021 at 12:24 PM

रंग सुर्ख होना चाहिए, चाय हो या फिर इश्क।

Submitted on 10 Jan, 2021 at 02:36 AM

अजीब सी कसमसाहट है इन दिनों, अजीब सी कसमसाहट है इन दिनों... वो जो सांस भी ना लेते थे मेरे बिना, बिन बात किये जी रहे है इन दिनों।

Submitted on 29 Dec, 2020 at 18:22 PM

ये श्यामें सिन्दूरी, तेरी मेरी ये दूरी। कब बैठे यूँ पास पास, कब होंगी हसरतें ये पूरी। मिलके भी यूँ मिल ना सके, हाय ये कैसी मजबूरी। ये श्यामें सिन्दूरी, तेरी मेरी ये दूरी...

Submitted on 11 Nov, 2020 at 02:51 AM

सफर बचपन से पचपन का, कुछ यूं बीता जनाब। मिल गए मिट्टी में, देखे थे जो जवां उम्र में ख्वाब।

Submitted on 25 Oct, 2020 at 05:43 AM

उम्र को जी कर भी, जीवन जिया नहीं उसने। सब कुछ सह कर भी, उफ्फ तक किया नहीं उसने। किस्सा दर्द का था कुछ ऐसा, कि सुनकर कलम भी रो पड़ी। जमाना जान गया सब। लेकिन अंजान रहा वो हमदर्द होने का वादा किया जिसने। 🖋️ विक्रांत

Submitted on 20 Oct, 2020 at 15:55 PM

नीले आकाश में लालिमा लिए ढ़लती सुंदर साँझ का इशारा समझो। कर्म से करें करनी कुछ उत्कर्ष ऐसी, ढ़लते जीवन की साँझ भी सुहानी हो जाए।

Submitted on 18 Oct, 2020 at 07:04 AM

सांस लेना ही जीवित होने का प्रमाण नहीं, जीवित वो है जिसका स्वाभिमान जिंदा है। 🖋️ विक्रांत


Feed

Library

Write

Notification
Profile