रोहित रौनक़
मेरे हर इक शेर का मर्कज़ जानते हो ! वो जो उसकी बिखरी-बिखरी यादें हैं। मेरे हर इक शेर का मर्कज़ जानते हो ! वो जो उसकी बिखरी-बिखरी यादें हैं।