अपनी मंज़िल की तलाश में, अपने आप की तलाश में, अपने अस्तित्व की वजह तलाशता एक अकेला राही।
मैं व्यथा का कवि हूँ, मेरी सोच में चिंतन है। मैं व्यथा का कवि हूँ, मेरी सोच में चिंतन है।
कब से कुछ लिखने का सोच रहा हूँ चाह कर भी कुछ लिख नहीं पा रहा हूँ कब से कुछ लिखने का सोच रहा हूँ चाह कर भी कुछ लिख नहीं पा रहा हूँ