I'm Govind and I love to read StoryMirror contents.
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जब भी वो यहां आता था, मुझसे ज़रूर मिलता था.. उसका मुझसे और मेरा उससे बड़ा ही प्यारा रिश्ता था.. अब वो बड़ा चंचल हो गया फोर्ट ऑफ संचल हो गया.. जलता रहा मैं दोस्ती में और तप कर वो कंचन हो गया.. गोविन्द