मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के 'राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ब्रह्मपुरा' में अंग्रेज़ी की शिक्षिका और रचनाकार। कैसे कह दूँ सब ठीक है(काव्य संग्रह) प्रकाशित
तितलियों को पकड़ने आये हैं नर्म शाख़ों से लटकते बच्चे तितलियों को पकड़ने आये हैं नर्म शाख़ों से लटकते बच्चे
वीरान दिल की राह में आई नहीं बहार चुभता है ये विरह का समय शूल की तरह वीरान दिल की राह में आई नहीं बहार चुभता है ये विरह का समय शूल की तरह
कामना है मेरी बस ये न हो इसका कोई भी अंत, हरी हो मन की यह धरती खिले हो प्रेम के पुष् कामना है मेरी बस ये न हो इसका कोई भी अंत, हरी हो मन की यह धरती खिले हो ...
जगी चेतना, विचार आ गया अपना बचपन याद आ गया। जगी चेतना, विचार आ गया अपना बचपन याद आ गया।
अपने ख्वाबों से बिखरे कुछ कागज़ के टुकड़ों को और ठूंस देती है उसे जिंदगी के बोरे में अपने ख्वाबों से बिखरे कुछ कागज़ के टुकड़ों को और ठूंस देती है उसे जिंदगी...