किताब, डायरी और वस्त्र सब बेज़ुबान से हैं, ये सूने कमरे के सन्नाटे भी हैरान से हैं। मंज़िलें छूट गईं, सफ़र भी ख़त्म हुआ अब, हम अपने चरम शून्यकाल के ढलते मुकाम से हैं।
तोड़ा है दिल उसने, तो ये अब शायरी बन के धड़केगा, जो ज़ख्म दिया है तुमने, वो ज़ख्म–नज़्म बन के महकेगा। तुमने तो सिर्फ़ एक पन्ना समझ कर छोड़ दिया था हमें, अब ये ज़माना हमारी ग़ज़लों को पढ़-पढ़ कर तड़पेगा।
कोरे से पन्ने छापके फिर साज दे टाईप राईटर सही तब काज दे हर उंगली खेले कुँजी पटलो में जब लिखते तो खट खट खट की वो आवाज दे © प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)
परिश्रम करे बिना नही मिलेगी सफलता नही मिलेगी बंदे तुम्हे उस ईश्वर से भीख कड़ी परिश्रम से मिलेगी सफलता अगर नही मिली तो असफलता से ले सीख
उलझे टूटे रिश्ते को सुलझाने की बात कराती है चाय इंतिजार करने से कराने से प्यार और बढ़ाती है चाय दो नए रिश्ते की शुरुआत कराती है यही हमारी चाय अदीबा/क़ातिब को जगाती और नींद भगाती है चाय
☕☕ कोई प्यार से बुलाये तो हमे ☕☕☕यक़ीन करो हम आ जायेंगे । ☕☕ बस एक कप चाय के लिए ☕☕☕ तेरा मेहमान ही बन जायेंगे । ©® प्रेमयाद कुमार नवीन