दुनिया कहती है जिसे बंदगी वह तो बस सिर्फ एक ज़रिया है, आँखों से जो बहता है प्यार में, वो अश्कों का ही तो दरिया है।
जाँ तुम, जानके ये सारी हदे पार करती हो बेवफ़ाई करके इस दिल पर वार करती हो अनजाने में हुई गर गलती, तो माफ़ करते पर तुम जानके गलती बार–बार करती हो © प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)
ना किसी से कोई शिकायते है और न किसी से कोई गिला है मेरे नसीब में जो भी लिखा था हमको सिर्फ वही ही मिला है ।
किताब, डायरी और वस्त्र सब बेज़ुबान से हैं, ये सूने कमरे के सन्नाटे भी हैरान से हैं। मंज़िलें छूट गईं, सफ़र भी ख़त्म हुआ अब, हम अपने चरम शून्यकाल के ढलते मुकाम से हैं।
तोड़ा है दिल उसने, तो ये अब शायरी बन के धड़केगा, जो ज़ख्म दिया है तुमने, वो ज़ख्म–नज़्म बन के महकेगा। तुमने तो सिर्फ़ एक पन्ना समझ कर छोड़ दिया था हमें, अब ये ज़माना हमारी ग़ज़लों को पढ़-पढ़ कर तड़पेगा।
कोरे से पन्ने छापके फिर साज दे टाईप राईटर सही तब काज दे हर उंगली खेले कुँजी पटलो में जब लिखते तो खट खट खट की वो आवाज दे © प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)
परिश्रम करे बिना नही मिलेगी सफलता नही मिलेगी बंदे तुम्हे उस ईश्वर से भीख कड़ी परिश्रम से मिलेगी सफलता अगर नही मिली तो असफलता से ले सीख