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सुबह-सुबह भास्कर अपनी किरणें बिखेर रहा था, चांदनी निशा को खदेड़ रहा था। खग भी वृक्ष पर बैठे कलरव कर ... सुबह-सुबह भास्कर अपनी किरणें बिखेर रहा था, चांदनी निशा को खदेड़ रहा था। खग भी वृ...