None
क्या कभी पी है चाय कुल्हड़ में, गली के नुक्कड़ पे। क्या कभी पी है चाय कुल्हड़ में, गली के नुक्कड़ पे।
अजीब सी है ये कलम और हम, लिखने से शिकायत पर लेखक बनने का भी मन। अजीब सी है ये कलम और हम, लिखने से शिकायत पर लेखक बनने का भी मन।
तूने तो है पहनी, आम आदमी की पोशाक नेता की कुर्सी के पास, है पैसों की साख़। तूने तो है पहनी, आम आदमी की पोशाक नेता की कुर्सी के पास, है पैसों की सा...