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प्रेम, प्रेम कहना उचित हो या न हो, शायद नैतिकता के पैमाने पर भी खरा न हो ये सब प्रेम, प्रेम कहना उचित हो या न हो, शायद नैतिकता के पैमाने पर भी खरा न हो ये सब
ज़िंदा क्यूँ रखना था उसको, ये समझ नहीं आया उसको। ज़िंदा क्यूँ रखना था उसको, ये समझ नहीं आया उसको।