पौरूष परिहार ।विजय नगर
चाहती हो, मुझे भूलना शौक से भूला दो तुमको मैं भूल जाऊँ। चाहती हो, मुझे भूलना शौक से भूला दो तुमको मैं भूल जाऊँ।
एक दहाड़ सच की लगाई है जंगल पूरा घबरा गया है... एक दहाड़ सच की लगाई है जंगल पूरा घबरा गया है...
कल तक जिन घरों मेंं लगती थी चौपालें बैठ बड़े-बुजुर्ग हुक्का पीते ,खेलते ताश कल तक इन्हीं ... कल तक जिन घरों मेंं लगती थी चौपालें बैठ बड़े-बुजुर्ग हुक्का पीते ,खेलते ...
आत्मा तो मेरी तुझमे है फिर ये माटी सुपूर्द -ए- खाक होगी। आत्मा तो मेरी तुझमे है फिर ये माटी सुपूर्द -ए- खाक होगी।
सोये कब्रिस्तान के मुर्दों मे भी जोश भर डालूँगा जो कुछ बचा लोहे का चचा भी लड़ने आयेगा ।। सोये कब्रिस्तान के मुर्दों मे भी जोश भर डालूँगा जो कुछ बचा लोहे का चचा भी लड़न...
होंंगे अंकुर (कर्म फल) घने। होंंगे अंकुर (कर्म फल) घने।
है ज्ञान कि देवी ,है माँ शारदे । भावों को मेरे ऐसे बद्वं दे बजा वीणा , कर झंकृत ,माँ विचार दे ... है ज्ञान कि देवी ,है माँ शारदे । भावों को मेरे ऐसे बद्वं दे बजा वीणा , कर झं...
गवाह तो मेरा खुद, खुदा है हकीकत उसे भी मेरी पता है। गवाह तो मेरा खुद, खुदा है हकीकत उसे भी मेरी पता है।
दूसरों को सुझाव दिये जा रहे हैं। दूसरों को सुझाव दिये जा रहे हैं।
उतनी ही खामोशी से तेरे गम लिये जा रहा हूँ। उतनी ही खामोशी से तेरे गम लिये जा रहा हूँ।